AFMS ने डायबिटिक रेटिनोपैथी के लिए लॉन्च किया भारत का पहला AI-ड्रिवन कम्युनिटी स्क्रीनिंग प्रोग्राम

उत्तर प्रदेश देश
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प्रयागराज। आर्म्ड फोर्सेज़ मेडिकल सर्विसेज़ (AFMS) ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थैल्मिक साइंसेज़ (RPC), AIIMS और मिनिस्ट्री ऑफ़ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर (MoHFW) की ई-हेल्थ AI यूनिट के साथ मिलकर 16 दिसंबर को नई दिल्ली में डायबिटिक रेटिनोपैथी (DR) के लिए भारत का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-ड्रिवन कम्युनिटी स्क्रीनिंग प्रोग्राम लॉन्च किया है। यह पहल डायबिटिक आंखों की बीमारी का जल्दी पता लगाने और एक रियल-टाइम नेशनल हेल्थ इंटेलिजेंस फ्रेमवर्क बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इस प्रोग्राम का उद्घाटन आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), नई दिल्ली में डायरेक्टर जनरल आर्म्ड फोर्सेज़ मेडिकल सर्विसेज़ सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन और डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थैल्मिक साइंसेज़ की चीफ प्रोफेसर राधिका टंडन ने किया। यह सहयोग AFMS की क्लिनिकल पहुंच, AIIMS की एकेडमिक लीडरशिप और MoHFW की डिजिटल इनोवेशन क्षमताओं को एक साथ लाता है ताकि एक बड़ी पब्लिक हेल्थ चुनौती का समाधान किया जा सके।

मधुनेत्रएआई का यह प्रोग्राम एक वेब-बेस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल है, जिसे डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थैल्मिक साइंसेज (RPC) ने डेवलप किया है। यह प्लेटफॉर्म हैंडहेल्ड फंडस कैमरों से कैप्चर की गई रेटिना इमेज की ऑटोमेटेड स्क्रीनिंग, ग्रेडिंग और ट्राइएजिंग की सुविधा देता है।

इससे ट्रेंड मेडिकल ऑफिसर, नर्सिंग स्टाफ और हेल्थकेयर असिस्टेंट कम्युनिटी-लेवल स्क्रीनिंग कर पाते हैं। यह सिस्टम सबूतों पर आधारित प्लानिंग और पॉलिसी बनाने में मदद के लिए बीमारी के फैलने और ज्योग्राफिकल डिस्ट्रीब्यूशन पर रियल-टाइम डेटा भी जेनरेट करता है।

पायलट फेज के हिस्से के तौर पर, आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज (AFMS) इस पहल को सात जगहों—पुणे, मुंबई, बेंगलुरु, धर्मशाला, गया, जोरहाट और कोच्चि—पर लागू करेगी, जिसमें मेट्रोपॉलिटन, ग्रामीण, पहाड़ी, तटीय और दूर के इलाके शामिल होंगे। हर साइट के कर्मचारियों को RPC, AIIMS में गहरी ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसके बाद बड़े पैमाने पर कम्युनिटी स्क्रीनिंग की जाएगी।

डायबिटिक रेटिनोपैथी वाले मरीजों को सबसे अच्छे डायबिटिक मैनेजमेंट के लिए रेफर किया जाएगा, जबकि आंखों को खतरा पहुंचाने वाली डायबिटिक रेटिनोपैथी के मामलों को तय डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में विट्रियो-रेटिना स्पेशलिस्ट के पास भेजा जाएगा। डिस्ट्रिक्ट हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन रेफरल मैकेनिज्म को कोऑर्डिनेट करेंगे और मौजूदा नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज प्रोग्राम के अंदर DR मैनेजमेंट को इंटीग्रेट करेंगे ताकि देखभाल जारी रहे।

लॉन्च के समय प्रोग्राम के मेथड और ऑपरेशनल गाइडलाइन्स की डिटेल वाला एक कलेक्शन जारी किया गया। इस कोलेबोरेशन को शुरू करने में आर्मी हॉस्पिटल (R&R) के HOD और कंसल्टेंट ऑप्थल्मोलॉजी ब्रिगेडियर एस के मिश्रा के योगदान को माना गया।

इस इनिशिएटिव को एक स्केलेबल और रेप्लिकेबल मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है, जो AFMS, AIIMS और मिनिस्ट्री ऑफ़ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर की मिली-जुली कोशिशों से पब्लिक हेल्थ सिस्टम में AI-इनेबल्ड सॉल्यूशंस के असरदार इंटीग्रेशन को दिखाता है।

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