समाज की परंपरा बचेगी, तब आदिवासी बचेंगे : महादेव टोप्‍पो

झारखंड
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  • पिठोरिया में धुमकुड़िया भवन का उद्घाटन

पिठोरिया। ओखरगड़ा पिठोरिया में धुमकुड़िया भवन का उद्घाटन किया गया। मौके पर टीम धुमकुड़िया, रांची के सहयोग से धुमकुड़िया-2025 का एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता जीतनाथ बेदिया ने की।  कार्यक्रम की शुरुआत सोमा उरांव के स्वागत भाषण से हुई।

कार्यशाला में आदिवासी समाज के कई बुद्धिजीवी सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसमें डॉ. नारायण उरांव,  साहित्यकार महादेव टोप्पो, लॉ कालेज यूनिवर्सिटी कांके के प्रोफेसर रामचन्द्र उरांव,  बिंदेश्वर बेक,  अजय कच्छप,  बीडीओ कामेश्वर बेदिया विशेष रूप से उपस्थित हुए।

महादेव टोप्पो ने आदिवासी पुरखों द्वारा पड़हा व्यवस्था को एकजुटता का माध्यम बताते हुए कहा कि जब आदिवासी समाज की परम्परा बचेगी, तब आदिवासी बचेंगे। हमारे पूर्वज धुमकुड़िया का प्रयोग शिक्षा देने के लिए करते थे। यहां सामूहिकता की सीख भी मिलती थी।

प्रोफेसर रामचंद्र उरांव ने आदिवासी की मदद व सामूहिकता के साथ भाषा-संसकृतिक को धुमकुड़िया के माध्यम से पुनर्जीवित करने और पुस्तकालय के माध्यम से आगे बढ़ाने पर बल दिया। उन्‍होंने बौद्धिक विकास पर ध्यान देने की बात कही।

बिंदेश्वर उरांव ने सप्ताह में एक दिन धुमकुड़िया में बैठने पर जोर दिया, जिससे बच्चे अपने विचार का आदान-प्रदान कर भविष्य के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें। जागेश्वर बेदिया ने बच्चों की प्रेरणा के लिए पढ़ाई पर जोर दिया। महादेव मुंडा ने बच्चों को नई पद्धति द्वारा में शिक्षा ग्रहण कराने की बात कही।

इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में कृष्णा पाहन, राजमोहन बेदिया, लालू बेदिया, नरेश बेदिया, मोहन उरांव, रघु पाहन, मंशा उरांव, सुरेश पाहन, रोमिला देवी, सीमा देवी, मंजू देवी, संजू मुंडा सहित के साथ टीम धुमकुड़िया के सदस्य फुलदेव भगत, रामचंद्र उरांव, ब्रजकिशोर बेदिया,  रवि कुमार तिर्की, प्रतीत कच्छप, कृष्णा धर्मेश लकड़ा और  जगत कुजूर की भूमिका सराहनीय रही। मंच का संचालन कृष्णा पाहन और ब्रज किशोर बेदिया ने किया।

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