- शिक्षा का मूल उद्देश्य ज्ञान के साथ चरित्र निर्माण भी : मनोज मिश्र
रांची। आदिकाल से भारत शिक्षा का केंद्र रहा है। अपनी विशिष्टताओं के लिए जाना जाता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों के चरित्र निर्माण और आत्म साक्षात पर केंद्रित होना चाहिए। शिक्षकों को भी अध्यापन के साथ-साथ अध्ययन करते रहना चाहिए।
उक्त विचार डीएवी पब्लिक स्कूल के सेवानिवृत प्राचार्य मनोज कुमार मिश्र ने लायंस क्लब रांची ईस्ट द्वारा आयोजित शिक्षक सह साक्षरता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए।
कार्यक्रम का आयोजन कोकर स्थित निरामया परिसर में किया गया। इस अवसर पर शिक्षिका उमा राजगढ़िया, जुथिका सान्याल, अनीता झा एवं शायरी अग्रवाल को सम्मानित किया गया।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ दिव्यांशु ने कहा कि आज का युग सिर्फ लिटरेसी का नहीं, बल्कि डिजिटल लिटरेसी का है। उन्होंने लोगों को अगाह किया कि अभी जरूरत है डिजिटल अरेस्ट से बचने की। अपना देश निरंतर शत प्रतिशत साक्षरता की ओर अग्रसर है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता क्लब की अध्यक्ष भारतेंदु झा ने की। सचिन अमित कुमार ने वर्ष भर का रिपोर्ट प्रस्तुत किया। अंजना गट्टानी ने कोष संबंधी जानकारी दी।
इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष दिवाकर राजगढ़िया, राम कृष्ण, नीरज साह, रोहित जायसवाल, राम बालक वर्मा, शिवानी सोनी, आशीष खेमका देवाशीष सान्याल सहित कई सदस्य उपस्थित थे।
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