उत्तर प्रदेश में एक साल में पांच IAS अफसरों ने लिया VRS, सबसे रसूख की नौकरी से क्यों भंग हो रहा मोह? जानें वजह

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उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में एक साल में पांच IAS अफसरों ने VRS ले लिया। आईएएस की नौकरी को सबसे रसूख की नौकरी मानी जाती है। भारतीय प्रशासनिक सेवा को देश में सबसे अधिक स्थायित्व और रुतबे वाली नौकरी माना जाता है।

आम धारणा है कि आईएएस यानी ‘आई एम सेफ’। लेकिन, इस नौकरी से भी मोहभंग होने लगा है। हाल ही में 2003 बैच के आईएएस अफसर रिग्जियान सैंफल ने वीआरएस के लिए अप्लाई किया है। यूपी में एक साल के भीतर वीआरएस मांगने वाले ये पांचवें अफसर हैं। वीआरएस का आवेदन मिलने के बाद नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग की तरफ से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वीआरएस में रिग्जियान सैंफल ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है।


पहले भी कई आईएएस अफसरों ने पारिवारिक और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए वीआरएस लिया। मगर बाद में प्राइवेट सेक्टर में नौकरी जॉइन कर ली। 2003 बैच के आईएएस अफसर विकास गोठलवाल का वीआरएस इसी साल मंजूर किया गया। वो अब एक मल्टीनेशनल कंपनी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। जिस दौरान विकास ने वीआरएस के लिए अप्लाई किया था, उस दौरान वो स्टडी लीव पर विदेश गए हुए थे।

इसी तरह 2008 बैच के आईएएस अफसर विद्या भूषण ने इसी साल आईएएस की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। चर्चा है कि वह भी किसी मल्टीनेशनल कंपनी को जॉइन कर सकते हैं। इससे पहले 1993 बैच के आईएएस अफसर राजीव अग्रवाल ने भी वीआरएस लिया था। बाद में उन्होंने फेसबुक जॉइन कर लिया।


जानें एक साल के भीतर किन अफसरों ने लिया VRS
एक साल के भीतर वीआरएस के लिए अप्लाई करने वाले रिग्जियान सैंफल पांचवें आईएएस अफसर हैं। इससे पहले 1987 बैच की आईएएस अफसर रेणुका कुमार ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से यूपी कैडर वापस भेजे जाने के बाद वीआरएस लिया था। 1988 बैच की जूथिका पाटणकर ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनाती के दौरान वीआरएस लिया। इसी तरह मेडिकल लीव पर रहते हुए 2003 बैच के विकास गोठलवाल ने वीआरएस ले लिया।

2008 बैच के विद्या भूषण ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए आईएएस की नौकरी से इसी साल इस्तीफा दे दिया। पिछले एक साल में जितने भी आईएएस अफसरों ने एक साल के भीतर वीआरएस लिया है। उनमें से एक को छोड़कर बाकी 20 साल से अधिक नौकरी कर चुके हैं। दरअसल, 20 साल की नौकरी पूरी करने के बाद पेंशन भी सुरक्षित हो गई है।


जानें क्यों हो रहा मोहभंग
सबसे ताकतवर नौकरी से मोहभंग की वजहें कई हैं। यूपी के पूर्व मुख्य सचिव योगेंद्र नारायण कहते हैं एक साल के भीतर पांच आईएएस अफसरों का वीआरएस लेना वाकई में चिंता की बात है। जिन लोगों ने नौकरी पूरी होने से साल भर पहले वीआरएस लिया, उनके कुछ पारिवारिक कारण या नौकरी में कुछ मतभेद हो सकते हैं। मगर लंबी सेवा बची होने पर जो अफसर वीआरएस ले रहे हैं, उसके पीछे एक बड़ी वजह प्राइवेट सेक्टर में अधिकारियों को अच्छी जॉब मिलना है।

आजकल आईएएस अफसर विभिन्न प्रॉजेक्ट्स में मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ मिलकर काम करते हैं। पहले इस तरह का एक्पोजर कम था और निजी क्षेत्र का हस्तक्षेप सीमित। ऐसे में निजी क्षेत्र से अच्छे ऑफर मिलने के बाद लोग सर्विस से इस्तीफा दे रहे हैं। सेवा में कुछ समय बिताने बाद के कुछ अफसरों को यह भी लगता है कि वो यहां से बेहतर काम प्राइवेट सेक्टर में कर सकते हैं। अपने सीनियर या मंत्री से मतभेदों की वजह भी कभी-कभार नए विकल्पों की ओर देखने को मजबूर करती है।