आईसीएआर दल ने बीएयू के बीज उत्पादन की समीक्षा की

झारखंड कृषि
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  • स्टेट सीड चैन को प्रभावी बनाने की दी सलाह

रांची। आईसीएआर समीक्षा दल ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशालय बीज एवं प्रक्षेत्र अधीन फसल बीज उत्पादन कार्यकमों को देखा। गतिविधियों का आकलन कार्य पूरा किया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर), नई दिल्ली द्वारा गठित इस दल का नेतृत्‍व बीकानेर स्थित स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर के अपर निदेशक अनुसंधान (बीज) डॉ एनके शर्मा कर रहे थे।

दल में में डॉ यगनेशविरादिया अनुवांशिकी व पौधा प्रजनन वैज्ञानिक एसडीएयू बीकानेर, डॉ नारायण रेड्डी सहायक प्राध्यापक सीड साइंस एंड टेक्नोलॉजी युएएस बंगलुरु और डॉ कुलदीप जयसवाल बायोटेक्नोलॉजी साइंटिस्ट इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ सीड साइंस मऊ शामिल थे।

दल ने बीएयू के निदेशालय बीज एवं प्रक्षेत्र अधीन राइस सेक्शन, वेस्टर्न सेक्शन एवं फॉरेस्ट्री साइड फार्मिंग सिस्टम सेक्शन के खेतों में ब्रीडर सीड, फाउंडेशन सीड एवं सर्टिफाइड सीड उत्पादन कार्यक्रम तहत लगे धान, सोयाबीन, मड़ुआ, मूंगफली, उरद,  अरहर आदि खडी खरीफ फसलों का निरीक्षण किया।

बीएयू निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र डॉ एस कर्माकार ने पिछले खरीफ मौसम की बीज उत्पादन उपलब्धियों तथा आगामी खरीफ मौसम में बीज उत्पादन की रणनीति की विस्तार से जानकारी दी। बताया कि खरीफ, 2021 में 109.55 क्विंटल ब्रीडर सीड, 2524.80 क्विंटल फाउंडेशन सीड, 265.53 क्विंटल सत्यापित बीज का उत्पादन किया गया। रबी 2021-22 में 15.75 क्विंटल ब्रीडर सीड, 783.53 क्विंटल फाउंडेशन सीड, 0.70 क्विंटल सत्यापित बीज का उत्पादन हुआ।

मौके पर प्लांट ब्रीडर डॉ रवि कुमार ने बीज उत्पादन एवं बीज की जांच कार्यो की जानकारी दी। बताया कि चालु खरीफ मौसम में धान, मकई, सोयाबीन, मड़ुआ, मूंगफली, उरद एवं अरहर के 14 उन्नत किस्मों के कुल 30.68 हेक्टेयर क्षेत्र में 467 क्विंटल संभावित बीज उत्पादन का टारगेट रखा गया है। भ्रमण के दौरान डॉ कौशल कुमार, काशीनाथ महतो, कुमार पंकज, आलोक कुमार, बाबुलाल महतो एवं सुजीत कुमार भी मौजूद थे। 

आईसीएआर दल ने सभी खड़ी फसलों विशेषकर धान एवं सोयाबीन के फसल पर संतोष जताया। विषम मौसम परिस्थिति में फसलों के बढ़िया प्रदर्शन की सराहना की। कहा कि विवि वैज्ञानिकों का स्थानीय उपयुक्त नये उन्नत किस्मों के विकास में उल्लेखनीय योगदान रहा है। इन सभी नये किस्मों को स्टेट सीड चैन की मुख्य धारा में जोड़ने की प्रभावी पहल होनी चाहिए। कृषि विभाग, एनजीओ और किसानों की सहभागिता से बीज उत्पादन कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सकता है।