बिरसा कृषि विवि को मिला प्रतिष्ठित फखरुद्दीन अली अहमद नेशनल अवार्ड

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  • आदिवासी किसानों के बीच समेकित कृषि प्रणाली को बढ़ावा के लिए दिया गया

रांची। झारखंड के एकमात्र बिरसा कृषि विश्‍वविद्यालय (बीएयू) को आदिवासी किसानों के बीच समेकित कृषि प्रणाली को बढ़ावा के लिए प्रतिष्ठित फखरुद्दीन अली अहमद नेशनल अवार्ड-2021 मिला है। टीम लीडर के तौर पर डॉ एमएस मल्लिक ने अवार्ड ग्रहण किया। नई दिल्‍ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (आईसीएआर) के 94वां स्थापना दिवस एवं पुरुस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। पूसा, नई दिल्ली के एनएसीसी परिसर स्थित एपी शिंदे सभागार में आयोजित इस समारोह में आईसीएआर ने प्रकाशन, वीडियो एवं आईसीएआर के विभिन्न पुरस्कारों का वितरण किया।

समारोह में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय को कृषि तकनीकी क्षेत्र में अनुप्रयोग की दिशा में आदिवासी समुदाय के बीच कृषि प्रणाली अनुसंधान को बढ़ावा में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित फखरुद्दीन अली अहमद नेशनल अवार्ड-2021 प्रदान किया गया। बतौर टीम लीडर बीएयू के वानिकी संकाय के डीन एवं नाहेप-कास्ट-आईएफएस परियोजना अन्वेषक डॉ एमएस मल्लिक ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से यह ग्रहण किया।

इस अवार्ड को मंच में मौजूद केन्द्रीय मंत्री मत्स्य पालन पशुपालन एवं डेयरी पुरुषोत्तम रुपाला, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री कैलाश चौधरी, आईसीएआर महानिदेशक डॉ त्रिलोचन महापात्र, आईसीएआर उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. एके सिंह और बीएयू कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह की मौजूदगी में प्रदान किया गया। मौके पर आईसीएआर संस्थान के सभी उप महानिदेशक, प्रधान वैज्ञानिक, वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी आदि भी मौजूद थे।

आईसीएआर द्वारा यह नेशनल अवार्ड हर वर्ष कृषि तकनीकी क्षेत्र में अनुप्रयोग की दिशा में आदिवासी समुदाय के बीच कृषि प्रणाली अनुसंधान को बढ़ावा देने के क्षेत्र में दिया जाता है। इस वर्ष यह अवार्ड बीएयू में संचालित नाहेप-कास्ट-आईएफएस परियोजना रांची में झारखंड के आदिवासी किसानों के बीच एकीकृत कृषि प्रणाली के अनुसंधान की समग्र सुविधा के विस्तार के लिए दिया गया है। टीम में नाहेप-कास्ट-आईएफएस परियोजना, नई दिल्ली के राष्ट्रीय समन्यवयक डॉ प्रभात कुमार एवं रांची केंद्र के रिसर्च एसोसिएट डॉ अदयंत कुमार शामिल है।

बीएयू कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह ने इस नेशनल अवार्ड के मिलने पर खुशी जाहिर की। वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने इसे नाहेप-कास्ट-आईएफएस परियोजना से जुड़े सभी वैज्ञानिक एवं शोधार्थियों के लगन एवं परिश्रम का फल बताया। कहा कि तीन दशक पहले यह अवार्ड बीएयू के वेटनरी संकाय के स्व. डॉ संत कुमार सिंह को टीएंडडी सूकर नस्ल का आदिवासी किसानों के बीच विस्तार एवं अनुप्रयोग में विशिष्ट योगदान के लिए दिया गया था। झारखंड एवं बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है।

बीएयू के डॉ एसके पाल, डॉ सुशील प्रसाद, डॉ जगरनाथ उरांव, डॉ डीके शाही, डॉ पीके सिंह, डॉ सोहन राम, डॉ बीके अग्रवाल आदि ने इसे विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। टीम को बधाई दी।